जीवन में समय को महत्व दुनिया में सभी वस्तुओं से बढ़कर है-The importance of time in life is greater than all things in the world
बिना लक्ष्य के अपने आपको ब्यस्त रखना और किसी निष्कर्ष पर न पहुंचना या अपने मंजिल पर न पहुंचना कहाँ की समझदारी है । ब्यस्तता उसी की सार्थक है जो तयशुदा समय में अपने लक्ष्य की ओरे सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ता चला जाये ।

मनुष्य इस भ्रम में जीता है की उसके पास पर्याप्त समय है । वह यह सोचता है की कोई भी काम कभी हो सकता है। वह हमेशा अपना काम कल पर टालता चला जाता है। फिर वह काम नहीं हो पाता है। और उसकी जिंदगी गुजर जाता है। मनुष्य को सोचना चाहिए की हमारा जीवन सीमित समय के लिए है । इसी सीमित समय में सारी उपलब्धियां ,अपना लक्ष्य प्राप्त करना है । समय से मूल्यवान इस दुनिया में कुछ भी नहीं है। जिसने समय का प्रबंधन सिख लिया उसने जग जीत लिया ।
सही दिशा में कार्यरत ब्यक्ति निरर्थक सम्बाद और गतिबिधियाँ गंतब्य तक पहुँचाने में बाधा पहुंचाते है। अतः वह ब्यक्ति इसमें नहीं उलझता है। जो भी है बस यही पल है। और समय लौट कर नहीं आता। इस पर विचार करते हुए कर्मवीर कोई पल नष्ट नहीं करता है। आचार्य शर्मा के अनुसार जिन्हें जीवन से प्रेम है। वे अपना मूलयवान समय नष्ट न करें ।
वर्तमान समय लौक् डाउन के दौर से गुजर रहा है। प्रकृति ने भागती दौड़ती जिंदगी को विश्राम करने का अवसर दिया है। मनुष्य को चाहिए की वह इन समय को सदुपयोग करे और उचित कार्यों में लगाये। दूर आ रहे लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अविलम्ब ठोस शुरुआत करे ।
हमें अपने आपको आश्वस्त कर ले की हमें कितना चाहिए और क्या चाहिए। फिर उस दिशा में ईमानदारी से लग जाना चाहिए । आज जो हम करेंगे उसी पर भविष्य का दामोदर निर्भर करता है । यही सोच उसे अकर्मण्य बनने नहीं देता है। मार्ग में आनेवाली बाधाओं का उसे पूर्व अनुमान रहता है। उसे ज्ञात रहता है, की काल प्रवाह में एक अप्रिय अध्याय का अर्थ खेल समाप्त होना नहीं हैं। विश्वस्त रहता है की वे दिन न रहे तो ये दिन भी न रहेंगें ।
ब्यस्त रहने वालों को दूसरों की निंदा करने की फुर्सत नहीं मिलती । वह नकारात्मक भावों से भी बचा रहता है। ब्यस्तता मनुष्य के मन और शरीर को जड़ नहीं होने देती। बल्कि उसे निरंतर परिस्कृत और विकसित करती रहती है। अकर्मण्य ब्यक्ति सार्थक ब्यस्तता से स्वतः मिलने वाले आनंद से भी बंचित रह जाता है ।
सही दिशा में कार्यरत ब्यक्ति निरर्थक सम्बाद और गतिबिधियाँ गंतब्य तक पहुँचाने में बाधा पहुंचाते है। अतः वह ब्यक्ति इसमें नहीं उलझता है। जो भी है बस यही पल है। और समय लौट कर नहीं आता। इस पर विचार करते हुए कर्मवीर कोई पल नष्ट नहीं करता है। आचार्य शर्मा के अनुसार जिन्हें जीवन से प्रेम है। वे अपना मूलयवान समय नष्ट न करें ।
वर्तमान समय लौक् डाउन के दौर से गुजर रहा है। प्रकृति ने भागती दौड़ती जिंदगी को विश्राम करने का अवसर दिया है। मनुष्य को चाहिए की वह इन समय को सदुपयोग करे और उचित कार्यों में लगाये। दूर आ रहे लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अविलम्ब ठोस शुरुआत करे ।
हमें अपने आपको आश्वस्त कर ले की हमें कितना चाहिए और क्या चाहिए। फिर उस दिशा में ईमानदारी से लग जाना चाहिए । आज जो हम करेंगे उसी पर भविष्य का दामोदर निर्भर करता है । यही सोच उसे अकर्मण्य बनने नहीं देता है। मार्ग में आनेवाली बाधाओं का उसे पूर्व अनुमान रहता है। उसे ज्ञात रहता है, की काल प्रवाह में एक अप्रिय अध्याय का अर्थ खेल समाप्त होना नहीं हैं। विश्वस्त रहता है की वे दिन न रहे तो ये दिन भी न रहेंगें ।
ब्यस्त रहने वालों को दूसरों की निंदा करने की फुर्सत नहीं मिलती । वह नकारात्मक भावों से भी बचा रहता है। ब्यस्तता मनुष्य के मन और शरीर को जड़ नहीं होने देती। बल्कि उसे निरंतर परिस्कृत और विकसित करती रहती है। अकर्मण्य ब्यक्ति सार्थक ब्यस्तता से स्वतः मिलने वाले आनंद से भी बंचित रह जाता है ।
जीवन में समय को महत्व दुनिया में सभी वस्तुओं से बढ़कर है-The importance of time in life is greater than all things in the world
It is sensible to keep yourself busy without aiming and not reaching any conclusion or reaching your destination. It is worthwhile to have an individual who moves ahead of his or her goal in a planned manner in the given time.
Man lives in the illusion that he has enough time. He thinks that any work can be done at any time. He always postpones his work tomorrow. Then that work cannot be done. And his life passes. Man should think that our life is for a limited time. In this limited time, all the achievements are to be achieved. There is nothing in this world valued by time. The person who learned to manage time won the world.
Persons working in the right direction impede redundant connections and activities to reach the destination. So that person does not get involved in it. Whatever it is, this is the moment. And the time does not come back. Karmaveer does not waste any moment considering this. According to Acharya Sharma, who loves life. They should not waste their prime time.
The current time is undergoing lockdown. Nature has given an opportunity to rest the running life. Man should use these time properly and put in proper works. Start a solid start to achieve the goals that are coming away.
Let us assure ourselves how much we need and want. Then it should be taken in that direction honestly. The future of Damodar depends on what we do today. This thinking does not allow him to become indolent. He anticipates the obstacles coming in the way. It is known to him that an unpleasant chapter in Kaal Pravah does not mean the game ends. It is believed that if those days are not there then these days will not last.

Those who are busy do not have the time to condemn others. He also avoids negative emotions. Settlement does not allow human mind and body to take root. Rather it continues to be cultivated and developed continuously. Indolent speech also keeps you from getting pleasure from meaningful busyness.
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